जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप

जापान में 7.4 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी

सुनामी का अलर्ट:4 से अधिक तीव्रता के 21 झटके

जापान में सोमवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जापानी मीडिया NHK के मुताबिक रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.4 दर्ज की गई। प्रशासन ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है। जापान के मौसम विभाग के मुताबिक 4 तीव्रता वाले 21 आफ्टर शॉक भी रिकॉर्ड किए गए हैं।

एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि 5 मीटर (16 फीट) ऊंची लहरें उठ सकती हैं। कोस्टल एरिया में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है। फिलहाल किसी के मारे जाने की खबर नहीं है। वहीं, रूस ने तटीय शहर व्लादिवोस्तोक और सखालिन आइलैंड में अलर्ट जारी किया है। यह आईलैंड जापान के उत्तरी इलाके में है।

भूकंप के बाद सुनामी का खतरा देखते हुए इंडियन एम्बेसी ने इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं। ये इस तरह हैं :

+ 81-80-3930-1715+ 81-70-1492-0049+ 81-80-3214-4734+ 81-80-6229-5382+ 81-80-3214-4722।

जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप

8 मिनट बाद ही 6.2 तीव्रता का दूसरा भूकंप जापान में


जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक भूकंप इशिकावा प्रांत के अनामिजु शहर में आया। इसका केंद्र धरती से 10 किलोमीटर नीचे था। भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 12:40 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसके 8 मिनट बाद ही 6.2 तीव्रता का पहला आफ्टर शॉक रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद 5.2 तीव्रता का दूसरा आफ्टर शॉक रिकॉर्ड किया गया। 4 तीव्रता वाले 21 आफ्टर शॉक रिकॉर्ड किए गए हैं।

फुकुशिमा प्लांट पर पैनी नजर
जापानी मीडिया के मुताबिक फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट पर पैनी नजर रखी जा रही है। दरअसल, जापान में मार्च 2011 में 9 तीव्रता वाले भूकंप के कारण जबर्दस्त सुनामी आई थी। तब उठी सुनामी की लहरों ने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को तबाह कर दिया था।

इसे पर्यावरण को नुकसान के लिहाज से बड़ी घटना माना गया था। तब समुद्र में उठी 10 मीटर ऊंची लहरों ने कई शहरों में तबाही मचाई थी। इसमें करीब 16 हजार लोगों की मौत हुई थी।

रिंग ऑफ फायर पर बसा है जापान
जापान भूकंप के सबसे ज्यादा सेंसिटिव एरिया में है। यहां भूकंप आते रहते हैं, क्योंकि ये दो टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन के पास स्थित है। इशिकावा प्रान्त, जहां भूकंप आया है, महासागर के चारों ओर भूकंपीय फॉल्ट लाइनों की एक घोड़े की नाल के आकार की श्रृंखला- रिंग ऑफ फायर के करीब स्थित है।

रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कॉन्टिनेंटल प्लेट्स के साथ ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी मौजूद हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है। इनके असर से ही सुनामी आती है और वोल्केनो भी फटते हैं।

दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग ऑफ फायर में आते हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं। 15 देश- जापान, रूस, फिलीपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।

दुनिया में हर साल 20 हजार भूकंप आते हैं
हर साल दुनिया में कई भूकंप आते हैं, लेकिन इनकी तीव्रता कम होती है। नेशनल अर्थक्वेक इंफॉर्मेशन सेंटर हर साल करीब 20,000 भूकंप रिकॉर्ड करता है। इसमें से 100 भूकंप ऐसे होते हैं जिनसे नुकसान ज्यादा होता है। भूकंप कुछ सेकेंड या कुछ मिनट तक रहता है। अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा देर तक रहने वाला भूकंप 2004 में हिंद महासागर में आया था। यह भूकंप 10 मिनट तक रहा था।

तुर्किये में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.4 आंकी गई। झटके लेबनान और इजराइल तक महसूस हुए। स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 8.30 बजे से 10 सेकंड तक झटके महसूस किए गए।

इंडोनेशिया के मुख्य आईलैंड जावा में आए भूकंप से 268 लोगों की मौत हो चुकी है। 700 से ज्यादा लोग घायल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में कई स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। भूकंप में 2 हजार से ज्यादा घर तबाह हो गए। 13 हजार लोग बेघर हैं। अस्थाई कैंपों, पार्किंग और सड़कों पर ही घायलों का इलाज किया जा रहा है।
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