अफगानिस्तान से दिल्ली तक भूकंप के झटके:6.1 रही तीव्रता

भूकंप के झटके:6.1 रही तीव्रता दिल्ली

गुरुवार दोपहर 2:20 बजे अफगानिस्तान के हिंदुकुश क्षेत्र में एक तेज भूकंप हुआ। पाकिस्तान के इस्लामाबाद, रावलपिंडी और भारत में जम्मू-कश्मीर से दिल्ली-एनसीआर तक इसका असर था।नेशनल सीसमोलॉजी सेंटर ने तीव्रता 6.1 बताई। इसका केंद्र जमीन से करीब 220 किलोमीटर नीचे हिंदुकुश में था। फिलहाल, कोई नुकसान की सूचना नहीं है।


4 नवंबर 2023 को रात 11:32 बजे नेपाल

में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें 157 लोग मारे गए। तब दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी झटके महसूस किए गए। भारत में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ था।6 नवंबर को शाम 4 बजे 16 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके फिर से महसूस किए गए। नेपाल भी इसका केंद्र था। तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.6 थी। इससे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश भी प्रभावित हुए।

दिल्ली भूकंप आने का क्या कारण है?


धरती की सतह सात बड़े और कई छोटे-छोटे टेक्टोनिक प्लेट्स से बना है। ये प्लेट्स बार-बार आपस में टकराती रहती हैं। टकराने से प्लेट्स के कोने कई बार मुड़ जाते हैं, और अधिक दबाव से ये प्लेट्स टूट जाते हैं। ऐसे में, नीचे से निकली ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है, जिससे भूकंप होता है

भूकंप के झटके:6.1 रही तीव्रता दिल्ली

2015 में भूकंप ने काठमांडू को 10 फीट गिरा दिया था।
2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप हुआ था, जो काफी नुकसान पहुंचा था। इस दौरान लगभग ९०० लोग मारे गए। इस ने देश की भूगोल भी बदल दी थी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के टैक्टोनिक एक्सपर्ट जेम्स जैक्सन ने बताया कि भूकंप के बाद काठमांडू के नीचे की जमीन करीब 10 फीट दक्षिण की ओर खिसक गई। हालाँकि, दुनिया की सबसे बड़ी पर्वत चोटी एवरेस्ट का भूगोल बदल नहीं गया है। नेपाल में हुआ यह भूकंप दो सौ बड़े परमाणु बमों से भी बड़ा था।


467 साल पहले चीन में हुए भूकंप में 8.30 लाख लोग मारे गए।
1556 में चीन में सबसे भयानक भूकंप हुआ, जिसमें 8.30 लाख लोग मारे गए। 22 मई 1960 को चिली में सबसे भयानक भूकंप हुआ था। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9.5 थी। इसकी वजह से हुई सुनामी ने दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड और दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों को बुरी तरह नष्ट कर दिया। इसमें 1655 लोग मर गए और 3000 घायल हो गए।

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