इंदौर लगातार 7वीं बार सिरमौर; स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 अवॉर्ड का ऐलान

इंदौर लगातार 7वीं बार सिरमौर; स्वच्छता सर्वेक्षण

इंदौर में 2024 के स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर ने फिर से सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में स्वच्छता सर्वेक्षण अवॉर्ड सेरेमनी में सीएम मोहन यादव को पुरस्कार दिया। गुजरात के शहर सूरत को भी सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला। एमपी के छह और छत्तीसगढ़ के पांच शहर पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। भोपाल को भी गार्बेज फ्री सिटी का पुरस्कार मिला है। मध्य प्रदेश के अमरकंटक, महू और बुधनी को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। आइए देखें कि इंदौर हर बार क्या करता है जिसकी बदौलत वह स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर है।

स्वच्छता गीत से शुरू करें: वास्तव में, मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में हर दिन स्वच्छता गीत से शुरू होता है।

वास्तव में, मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में हर दिन स्वच्छता गीत से शुरू होता है। यहाँ सूरज निकलने से पहले ही स्वच्छताकर्मी अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए मोर्चा संभाल लेते हैं, जिससे शहर भर में स्वच्छता का दौर शुरू हो जाता है। इस दौरान शहर के चार लाख 65,000 घरों से गिला और सूखा कचरा एकत्र करने के लिए शहर के सभी 85 वार्ड में कचरा वाहन अलग-अलग स्टेशनों से चलते हैं।

यहां प्रतिदिन करीब 6 लाख डोर स्टेप से निकलने वाला 1192 टन गीला कचरा, जबकि बाकी 992 टन सूखा कचरा है। यह कचरा घर से ही सूखे और गीले दोनों तरह से निकाला जाता है। इससे पहली बार सूखे और गीले कचरे मिलते हैं। यह कचरा भी देश में सर्वाधिक 97% सेग्रीगेशन परसेंटेज है। यह कचरा शहर के विभिन्न स्थानों पर तैयार किए गए 10 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन पर 575 कचरा गाड़ी से इकट्ठा किया जाता है. इसके बाद, गीले कचरे से बायो सीएनजी बनाने और सूखे कचरे को अलग-अलग रूपों में छटाई करके बेचने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है।

स्थापित हुआ एशिया का सबसे बड़ा गोबरधन प्लांटः
यहां एशिया का सबसे बड़ा गोवर्धन प्लांट (पीपीपी मोड) गीले कचरे से बायो मीथेन बनाने के लिए बनाया गया है। जो बायो मिथेन गैस को बनाकर बेचता है। विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए पीपीपी मॉडल से निर्मित नेप्रा प्लांट से कचरा निकालकर उसे बेचा जा रहा है। देश के अन्य नगरीय क्षेत्रों में, कचरे के कारण ₹600 मेट्रिक टन की आय कचरे के निपटान में खर्च होती है। वही इंदौर में कचरे से सालाना 12 करोड़ रुपए की कमाई होती है।

इंदौर में स्वच्छता को बनाया ब्रांड:

इंदौर शहर ने स्वच्छता को ही अपना ब्रांड बना रखा है. फिलहाल स्वच्छता के क्षेत्र में 22 से ज्यादा स्टार्टअप यहां शुरू हुए हैं. यह मशीन मैन्युफैक्चरिंग क्लीन सर्विसेज प्रोसेसिंग और गार्बेज इनोवेशन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों प्रवासी भारतीय सम्मेलन की-20 की मेजबानी के कारण इंदौर चर्चा में है. होटल इंडस्ट्री में इंदौर की सुरक्षा के कारण 20% कारोबार बड़ा है. यहां पर विजय 2 साल में 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि इंदौर की स्वच्छता देखने के लिए पहुंचे हैं. इसके अलावा झोला बैंक के जरिए प्लास्टिक थैलियां का विकल्प तैयार किया 3 स्टार रैंकिंग में अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग के लिए केंद्र खोले गए.

इंदौर लगातार 7वीं बार सिरमौर; स्वच्छता सर्वेक्षण


डिस्पोजल को प्रतिबंधित किया:
स्क्रैप पार्क में वेस्ट मटेरियल से कई तरह की कृतियां, झूले और मनोरंजन की चीज बनाकर पर
तैयार किया गया है. इसके अलावा शहर में 50 से ज्यादा लाइनों का सफाई कर सौंदरीकरण किया गया है. डिस्पोजल को प्रतिबंधित करने के साथ बर्तन बैंक बनाए गए हैं. जिसमें विभिन्न आयोजनों के लिए नगर निगम किराए पर बर्तन देता है. वही हम कंपोस्टिंग के जरिए जैविक खाद बनाने के लिए पहल की गई है वहीं शहर में एक लाख से ज्यादा रूप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं एवं वाटर बॉडी की जिओ फेंसिंग की गई है.

इंदौर की स्वच्छता का सफर: इन्दौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब पहली बार वर्ष 2017 में मिला, इसके बाद वर्ष

इंदौर लगातार 7वीं बार सिरमौर; स्वच्छता सर्वेक्षण


2016 से घर-घर कचरा कलेक्शन गीला-सूखे कचरे को अलग करना सैनिटेशन के तहत टॉयलेट एवं यूरिनल का निर्माण तथा गीले- सूखे कचरे के शत-प्रतिशत प्रोसेसिंग शुरू की गई. इसी दरमियान 2018 एवं 2019 में शहर के नागरिकों जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, रहवासी एवं बाजार, मीडिया साथियों एवं नगर निगम इन्दौर के सफाई कर्मियों तथा अन्य अधिकारियों को इस अभियान में शामिल किया.

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन अभियान:
इसी दरमियान नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर रहे मनीष सिंह ने नगर निगम की जो राशि कचरे के निपटान में खर्च होती थी उस राशि से कचरा गाड़ी खरीद कर कुछ वार्ड में पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू किया, इसके बाद जरूरत के मुताबिक गीले और सूखे कचरे को अलग किए जाने लगा. यही आदत नगर निगम ने अभियान चलाकर शहर भर के लोगों को डलवाई और कचरा कलेक्शन एवं परिवहन को लेकर कलेक्शन पॉइंट और गार्बेज स्टेशन तैयार किए गए.

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