देश का सबसे बड़ा पंचकल्याणक महोत्सव इंदौर मे शुरू हुआ

राजेश जैन दद्दू

इंदौर घट स्थापना के साथ हुई शुरूआत, कलश यात्रा भी निकली, दिगंबर जैन समाज के हजारों लोग बने शोभायात्रा के साक्षी

इन्दौर की धरा पर देश का सबसे बड़ा व भव्य पंचकल्याणक महोत्सव की शुरूआत बुधवार को सुमतिधाम पर चर्याशिरोमणि श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुई। सुबह के सत्र में सुमतिधाम घट स्थापना की भव्य शोभायात्रा व कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें सभी इंद्र-इंद्राणी बग्घियों पर सवार थे तो वहीं बैंड़-बाजों की स्वरलहरियों पर महिलाएं मंगल कलश हाथों में लिए चल रही थी। घट स्थापना की निकली शोभायात्रा मेें राजकमल बैंड के साथ ही हाथी, घोड़े, ऊंट भी यात्रा के अग्र भाग में शामिल थे। वहीं ढ़ोलक की थाप पर महिलाएं नाचते व मंगल गीत गाते हुए चल रही थी। पंचकल्याणक महामहोत्सव समिति आयोजक मनीष-सपना गोधा ने बताया कि 6 से 11 मार्च तक आयोजित होने वाले देश के सबसे बड़े पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह 11 बजे आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीपकुमार जैन मधुर (मुंबई), सह-प्रतिष्ठाचार्य चंद्रकांत गुंडप्पा इंड़ी (कर्नाटक), पं. नितिनजी झांझरी (इन्दौर), विधानाचार्य पीयूष प्रसून (सतना) एवं तरूण भैय्याजी (इन्दौर) के सान्निध्य में पाद प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट, कलश पूजन, ध्वजारोहण की सभी विधियां संपन्न की गई। पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य लाभार्थी मनीष-सपना गोधा परिवार थे। ध्वजारोहण का लाभ बसंतीलाल विजया डोसी, प्रफुल्ल लता जैन, राजेंद्र-मंजू झांझरी, विजय-नीलम चौधरी, जिनेश-सुनीता बडज़ात्या ने लिया तो वहीं पाद-पक्षालन में रमेश कुमार गुणमाला काला, अभिषेक-श्रिषिका एवं आशीष-स्वाति लाभार्थी थे। आचार्यश्री को जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य कमलेश-सोनाली पाटोदी, अरिन-अनवि (फरीदाबाद) को मिला। मण्डप उद्घाटनकर्ता का लाभ महेंद्र-अजीत टोंग्या (भानपुरा), रतनलाल-महावीर प्रसाद झांझरी, अभिषेक-आशीष काला ने लिया।

यह थे महोत्सव के मुख्य पात्र – गांधी नगर के गोधा एस्टेट में होने वाले इस पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य पात्र मनीष-सपना गोधा (सौधर्म इंद्र), रमेश-गुणमाला काला हैदराबाद (माता-पिता), कमलेश-सोनाली पाटोदी फरीदाबाद (कुबैर), विनोद-सरोज गोधा ( महायज्ञनायक) एवं दिलीप-अर्चना गोधा (यज्ञनायक) हैं। इसी के साथ ही महोत्सव में 5000 हजार इंद्र-इंद्राणियों ने अपनी भागीदारी दर्ज की। इंद्र-इंद्राणियों को पूजन की आवश्यक सामाग्रियां भी महोत्सव समिति द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई थी। संभवत: देश का यह पहला पंचकल्याणक महोत्सव होगा जिसमें न तो किसी प्रकार का दान लिया गया है और न ही किसी प्रकार की बोलियां इस महोत्सव में बोली गई हैं।

सुमतिधाम का नजारा जिसने भी देखा वह देखता रह गया – सुमतिधाम पर आयोजित पंचकल्याणक संभवत:देश का सबसे बड़ा पंचकल्याणक महोत्सव हैं। पंचकल्याणक महोत्सव में अतिथियों के लिए 100 कोटेज बनाए गए हैं वहीं इंद्र-इंद्राणियों, अतिथियों व समाज बंधुओं के लिए 4 भोजन शाला बनाई गई है। इन 4 भोजन शालाओं को स्नेहभोजन, वात्सल्य भोजन, द्वारका एवं मधुबन भोज नाम दिए गए हैं। वहीं पंचकल्याणक महोत्सव की सभी विधियां जिस स्थान पर हो रही हैं उसे कल्याण भवन नाम दिया गया है जिसमें लगभग 5000 हजार इंद्र-इंद्राणियों की बैठने की व्यवस्था की गई है। प्रवचन हाल के बाहर का दृश्य आकर्षक थर्माकोल से डिजाईन किया गया है जिसकी सुंदरता दुर से ही दिखाई पढ़ती है। सुमतिनाध और संत निवास के मध्य खाली स्थान पर 30 फीट की सुमतिनाथ की प्रतिमा भी यहां आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है रात को लेजर लाईट का शो भी यहां आयोजित हो रहा है। वहीं बुजुर्गों को प्रवचन हाल तक लाने-ले-जाने के लिए इलेक्ट्रीक गोल्फ कार एवं 7 डी के माध्यम से भगवान सुमतिनाथ की शार्ट फिल्म ने भी सभी समाज बंधुओं का खूब मन मोहा।

भक्त भगवान के बीच श्रद्धा व श्रद्धेय का संबंध हैं- विशुद्ध सागर जी
भक्ति गाय के समान होना चाहिए जो घास, भूसा व दाना खाकर भी दूध देती है ऐसी ही भक्ति अरिहंत की होनी चाहिए। प्रत्याख्यान का फल भोग ही मिलता है। एक संत संसार के पुदगल के लिए नहीं इच्छाओं के भोग के लिए मुनि बनता है। भक्त और भगवान इन दोनों के बीच श्रद्धा श्रध्येय का संबंध है। जिसने जितना बड़ा त्याग किया उसे उतना बड़ा भोग मिलता है। छोटे त्याग से स्वर्ग भी छोटा ही मिलता है।

आज गर्भ कल्याणक महोत्सव- पंचकल्याणक महामहोत्सव समिति आयोजक मनीष-सपना गोधा ने बताया कि गुरूवार 7 मार्च को पंचकल्याणक महोत्सव के दुसरे दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। जिसमें प्रात: 6.30 बजे विधिकारकों द्वारा सभी पूजन की विधियां संपन्न करवाई जाएंगी साथ ही दोपहर 1 बजे माता की गोद भराई एवं शाम 7.30 बजे गर्भोत्सव की खुशियां मनाई जाएगी। शुक्रवार 8 मार्च को सुबह 7.30 बजे पूजन की सभी विधियों के साथ ही प्रात: 10.30 बजे जन्माभिषेक का उत्सव मनाया जाएगा एवं शाम 7.30 बजे पालनोत्सव में सभी समाज बंधुओं और महिला मंडल द्वारा गीत व भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। शनिवार 9 मार्च को दीक्षा एवं तप कल्याणक महोत्सव, रविवार 10 मार्च को ज्ञान कल्याणक महोत्सव एवं सोमवार 11 मार्च को मोक्ष कल्याणक महोत्सव के साथ ही इस 6 दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का समापन होगा। 6 दिवसीय महामहोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा। 6 से 11 मार्च तक महोत्सव के दौरान सुबह के सत्र में चर्याशिरोमणि श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज द्वारा प्रवचनों की अमृत वर्षा भी इस दौरान की जाएगी।

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