कीर्ति सिंह गौड़ के कविता संग्रह का हुआ विमोचन

पुस्तक अमेजॉन पर उपलब्ध

इंदौर :आशीष नेमा,

शहर की बहुविध प्रतिभा की धनी कीर्ति सिंह गौड़ अच्छी जर्नलिस्ट व एंकर होने के साथ हिंदी साहित्य में भी दखल रखती हैं। हाल ही में उनका पहला काव्य संग्रह “सच कहूं, ये कलम की सोहबत है” प्रकाशित हुआ है। शनिवार शाम आयोजित एक गरिमामय समारोह में इस काव्य संग्रह का विधिवत लोकार्पण किया गया।

मालवीय नगर में बर्फानी धाम के ठीक सामने स्थित सोपा सभागृह में आयोजित विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने की। सहायक आयुक्त राज्यकर विजय सोहनी और सांध्यकालीन अखबार 6पीएम के प्रबंध संपादक संजय लुनावत विशेष अतिथि के बतौर मौजूद रहे। सरस्वती वंदना और दीप प्रज्जवलन के बाद सभी अतिथियों ने रचनाकार कीर्ति सिंह गौड़ के काव्यसंग्रह “सच कहूं – ये कलम की सोहबत का है।” का तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विमोचन किया। इस मौके पर कीर्ति सिंह के जीवन परिचय पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

कविता संग्रह पर अपने विचार रखते हुए मुख्य अतिथि सत्यनारायण सत्तन ने कीर्ति के साहित्य के प्रति अनुराग की सराहना की। उन्होंने कहा कि कीर्ति सिंह ने अपनी कविताओं में जीवन के हर रंग को समेटने की कोशिश की है। बता दें कि श्री सत्तन ने कीर्ति के इस काव्यसंग्रह में अपना मनोगत भी लिखा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कीर्ति सिंह गौड़ के पहले काव्यसंग्रह की सराहना करते हुए कहा कि इसमें निहित रचनाएं जिंदगी की ओर देखने का नया नजरिया देती हैं।

विशेष अतिथि विजय सोहनी और संजय लुनावत ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे और काव्यसंग्रह के लेखन के लिए कीर्ति सिंह को बधाई दी।

कविता संग्रह की लेखिका कीर्ति सिंह गौड़ ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में अपने रचना कर्म की शुरुआत की थी। जब रचनाओं का अच्छा खासा संकलन हो गया तो परिजनों, परिचितों और स्नेहीजनों के अनुरोध पर उन्होंने इन रचनाओं को पुस्तक का रूप देने का निश्चय किया। उनके इस काव्यसंग्रह ” सच कहूं – ये कलम की सोहबत है।” में 80 कविताएं संकलित हैं। हर तरह के मनोभाव और विषयों को इसमें समाहित किया गया है। उनकी ये पुस्तक अमेजॉन पर उपलब्ध है।

कीर्ति सिंह गौड़ के कविता संग्रह के विमोचन समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, प्रबुद्धजन और स्नेहीजन उपस्थित थे।

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